सीएम मान ने ‘युद्ध नशों विरुद्ध’ अभियान की प्रगति की समीक्षा कीसीएम मान ने ‘युद्ध नशों विरुद्ध’ अभियान की प्रगति की समीक्षा की

चंडीगढ़; 15 सितंबर। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आज घोषणा की कि पंजाब का ‘युद्ध नशों  विरुद्ध’ अभियान अपने अंतिम चरण में प्रवेश कर गया है। उन्होंने राज्य से इस बुराई को जड़ से उखाड़ने के लिए निर्णायक कदम उठाने को कहा। इस संबंध में उच्च-स्तरीय बैठक के दौरान ‘युद्ध नशों  विरुद्ध’ अभियान की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने पुलिस को निर्देश दिया कि वह लोगों के साथ मिलकर नशा बेचने वालों, सप्लायरों और तस्करों के विरुद्ध जमीनी स्तर पर कार्रवाई तेज करे। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई अब केवल पुलिस तक सीमित नहीं रही, बल्कि ‘जन आंदोलन’ बन गई है। इसका प्रमाण ‘विलेज डिफेंस कमेटियों’ से प्राप्त फीडबैक में हुई 41 प्रतिशत वृद्धि से मिलता है, जो इस अभियान में लोगों की बढ़ती भागीदारी को दर्शाती है।
‘युद्ध नशों  विरुद्ध’ अभियान की समीक्षा के लिए आयोजित उच्च-स्तरीय बैठक की अध्यक्षता करते हुए मुख्यमंत्री ने राज्य भर के उपायुक्तों, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षकों (एस.एस.पी.), पुलिस आयुक्तों और आई.जी.पी./डी.आई.जी. से वर्चुअल माध्यम से बातचीत की। उन्होंने नशा-विरोधी अभियान की प्रगति, विलेज डिफेंस कमेटियों (वी.डी.सी.) की भूमिका, तस्करों के विरुद्ध पुलिस की कार्रवाई और जमीनी स्तर पर प्राप्त शिकायतों पर कार्रवाई की व्यवस्था की समीक्षा की।
इस दौरान मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “‘युद्ध नशों विरुद्ध’ अब अपने अंतिम चरण में है और पुलिस को जमीनी स्तर पर कार्रवाई और तेज करनी चाहिए। अब अंतिम प्रहार करने का समय आ गया है और बेहतर परिणामों के लिए जमीनी स्तर पर नशों से सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों (हॉटस्पॉट्स) को निशाना बनाने की आवश्यकता है।”
मुख्यमंत्री ने कहा, “ऐसे पंजाब का निर्माण करना बेहद जरूरी है, जहां युवा पीढ़ी नशों की बुराई से मुक्त होकर जीवन जी सके।” उन्होंने कहा, “जब तक पंजाब से नशों का पूरी तरह सफाया नहीं हो जाता, तब तक हमारी सरकार चैन से नहीं बैठेगी।”
मुख्यमंत्री ने बताया कि इस समय पंजाब में 74,230 सक्रिय सदस्यों वाली 14,846 विलेज डिफेंस कमेटियां कार्यरत हैं। ये कमेटियां नशों के विरुद्ध लोगों की इस सामूहिक लड़ाई का एक महत्वपूर्ण स्तंभ बन गई हैं। उन्होंने बताया कि सीमावर्ती क्षेत्रों में 36,814 सदस्यों वाली 3,808 विलेज डिफेंस कमेटियां कार्यरत हैं। इन क्षेत्रों में नशा तस्करी के नेटवर्क की पहचान करने और उन्हें तोड़ने के लिए सामुदायिक भागीदारी बेहद महत्वपूर्ण है।
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “राज्यवासियों की बढ़ती भागीदारी जमीनी स्तर पर सरकार की खुफिया और फीडबैक प्रणाली को मजबूत कर रही है।” उन्होंने कहा कि लोगों की बढ़ती भागीदारी राज्य भर में नशों के विरुद्ध लड़ाई को मजबूत कर रही है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य भर में नशों से संबंधित वी.डी.सी. से प्राप्त फीडबैक में 41 प्रतिशत वृद्धि हुई है, जो अभियान में बढ़ती जनभागीदारी को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि वी.डी.सी. के माध्यम से प्राप्त शिकायतों के आधार पर पुलिस द्वारा नशा तस्करों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जा रही है।
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने बताया, “इस वर्ष जनवरी से अब तक वी.डी.सी. से प्राप्त शिकायतों के आधार पर 4,129 एफ.आई.आर. दर्ज की गई हैं और 5,589 नशा तस्करों को गिरफ्तार किया गया है।”
मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि ‘सेफ पंजाब ऐप’ नशों से संबंधित गतिविधियों की सूचना देने के लिए नागरिकों के लिए एक महत्वपूर्ण साधन बनकर उभरी है। उन्होंने बताया कि पिछले एक वर्ष से अधिक समय के दौरान इस ऐप के माध्यम से प्राप्त शिकायतों के आधार पर लगभग 19,310 एफ.आई.आर. दर्ज की गई हैं और 25,138 नशा तस्करों को गिरफ्तार किया गया है।
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “ये आंकड़े दर्शाते हैं कि नशों के विरुद्ध लड़ाई अब केवल थानों या सरकारी कार्यालयों तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह जन आंदोलन का रूप ले चुकी है, जो हर गांव और मोहल्ले में लड़ी जा रही है।”
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार पहले ही नशों की सप्लाई के नेटवर्क की कमर तोड़ने में सफल हो चुकी है और बड़ी संख्या में तस्करों तथा सप्लायरों को जेलों में भेजा जा चुका है। उन्होंने चेतावनी दी कि इस लड़ाई को तब तक समाप्त नहीं माना जा सकता, जब तक सप्लाई चेन को पूरी तरह तोड़ नहीं दिया जाता और हर गांव को नशा-मुक्त नहीं बनाया जाता।
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “राज्य सरकार ने नशों की सप्लाई को पूरी तरह तोड़ दिया है, लेकिन यह सतर्कता कम करने का समय नहीं है।”

उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा, “नशा बेचने वालों, सप्लाई करने वालों और तस्करों को समझ लेना चाहिए कि पंजाब में उनके लिए कोई जगह नहीं है और पंजाब सरकार उनके विरुद्ध कड़ी कार्रवाई करेगी।” मुख्यमंत्री ने सिविल और पुलिस प्रशासन को गांव सुरक्षा समितियों (वी.डी.सी.) की फीडबैक प्रणाली को और मजबूत करने तथा निचले स्तर से प्राप्त जानकारी पर तुरंत कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि नशों से संबंधित गतिविधियों की रिपोर्टिंग की पूरी प्रणाली को और सरल तथा सुगम बनाया जाना चाहिए, ताकि बिना किसी झिझक के वास्तविक शिकायतें दर्ज की जा सकें और नशा तस्करों के विरुद्ध तुरंत कार्रवाई की जा सके। इसके साथ ही उन्होंने वी.डी.सी. के जिम्मेदाराना कामकाज की आवश्यकता पर जोर देते हुए सदस्यों को अपनी जिम्मेदारी निभाते समय उचित रवैया अपनाने के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने स्पष्ट रूप से कहा, “नशों के विरुद्ध जंग में अधिकारियों को अपने-अपने जिलों में ‘युद्ध नशों विरुद्ध’ अभियान के दौरान अपनाए गए बेहतर तरीकों की पहचान करनी चाहिए और उन्हें साझा करना चाहिए, ताकि ऐसे सफल मॉडलों को पूरे पंजाब में लागू किया जा सके।”

मुख्यमंत्री ने वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को वी.डी.सी. सदस्यों और इससे जुड़े जमीनी स्तर के अन्य लोगों के साथ तालमेल बनाए रखने तथा फीडबैक प्रणाली को और अधिक प्रभावी, पारदर्शी और परिणामोन्मुख बनाने को कहा। उन्होंने घोषणा की कि वह एस.एच.ओ. के साथ व्यक्तिगत रूप से बैठकें करेंगे, ताकि थाना स्तर पर नशा-विरोधी अभियान की समीक्षा करने के साथ-साथ नशों के विरुद्ध चल रही जंग को और तेज किया जा सके।
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “एस.एच.ओ. पुलिस प्रशासन और जमीनी स्तर पर लोगों के बीच सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है, इसलिए थाना स्तर पर जवाबदेही और कार्यक्षमता को मजबूत किया जाएगा।”

मुख्यमंत्री ने कहा, “नशों के विरुद्ध जंग हमारे गांवों, गलियों और मोहल्लों में जमीनी स्तर पर जीती जाएगी।” उन्होंने कहा, “राज्य में नशों की बुराई को रोकने के लिए हर एस.एच.ओ., हर पुलिस अधिकारी और हर सिविल अधिकारी को सतर्क रहना चाहिए।”

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने अधिकारियों को सिविल प्रशासन, पुलिस, वी.डी.सी. और नागरिकों के बीच निरंतर तालमेल बनाए रखने के निर्देश दिए, ताकि नशा-विरोधी अभियान निरंतर जन आंदोलन बना रहे।

इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री अमन अरोड़ा, हरपाल सिंह चीमा, डॉ. बलबीर सिंह, हरभजन सिंह ई.टी.ओ., गुरमीत सिंह खुड्डियां, हरदीप सिंह मुंडियां और बरिंदर गोयल के अलावा मुख्य सचिव के.ए.पी. सिन्हा, डी.जी.पी. गौरव यादव और अन्य अधिकारी भी उपस्थित थे।

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