नई दिल्ली, 7 जुलाई। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आज नई दिल्ली में केंद्रीय कृषि, ग्रामीण विकास एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने प्रदेश की कृषि एवं बागवानी से जुड़ी विभिन्न योजनाओं के क्रियान्वयन और विस्तार पर विस्तृत चर्चा की।
3,800 करोड़ की कृषि योजनाओं को मिली केंद्र की सैद्धांतिक मंजूरी
मुख्यमंत्री ने बताया कि उत्तराखंड सरकार ने कृषि एवं बागवानी क्षेत्र के समग्र विकास के लिए लगभग 3,800 करोड़ रुपये की योजनाएं तैयार की हैं। इनमें नवाचार, यंत्रीकरण, तकनीकी समावेशन और पारंपरिक खेती को बढ़ावा देना शामिल है। केंद्रीय मंत्री ने इन योजनाओं को सैद्धांतिक स्वीकृति प्रदान की, जिस पर मुख्यमंत्री ने आभार जताया।
जंगली जानवरों से फसल सुरक्षा के लिए 1,052 करोड़ का प्रस्ताव
मुख्यमंत्री ने कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों में जंगली जानवरों से फसलों की सुरक्षा के लिए 1,052.80 करोड़ रुपये की कृषि बाड़ योजना प्रस्तावित है। इसके अलावा, 10,000 फार्म मशीनरी बैंक स्थापित करने के लिए 400 करोड़, मिलेट मिशन के तहत 134.89 करोड़ और बीज उत्पादन हेतु 5 करोड़ रुपये की योजनाएं भी शुरू की जाएंगी।
सेब, कीवी और ड्रैगन फ्रूट को बढ़ावा देने के लिए बड़ी योजनाएं
राज्य सरकार ने सेब उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए 1,150 करोड़, कीवी की खेती के लिए 894 करोड़ और ड्रैगन फ्रूट जैसी कम जोखिम वाली फसलों के लिए 42 करोड़ रुपये की योजनाएं प्रस्तुत की हैं। साथ ही, कृषि स्टार्टअप्स को प्रोत्साहित करने के लिए 885.10 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
जैविक खेती, डिजिटल भूमि सर्वे और एग्री-टूरिज्म पर जोर
मुख्यमंत्री ने जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए 36.50 करोड़, भूमि अभिलेखों के डिजिटलीकरण के लिए 378.50 करोड़ और एग्री-टूरिज्म स्कूल स्थापित करने के लिए 14 करोड़ रुपये की योजनाओं की जानकारी दी।
केंद्रीय मंत्री ने दिया पूर्ण सहयोग का आश्वासन
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने उत्तराखंड की योजनाओं पर सकारात्मक प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि राज्य के किसानों की बेहतरी के लिए हर संभव सहायता प्रदान की जाएगी। इसके अलावा, पीएमजीएसवाई के अधूरे कार्यों की समय सीमा बढ़ाने पर भी सहमति दी गई।
बैठक में केंद्रीय कृषि सचिव देवेश चतुर्वेदी, ग्रामीण विकास सचिव शैलेश कुमार सिंह और उत्तराखंड के स्थानिक आयुक्त अजय मिश्रा भी उपस्थित रहे।

