लुधियाना, 8 अप्रैल। पंजाब के भूमि एवं जल संरक्षण, खान एवं भू-विज्ञान तथा जल संसाधन मंत्री बरिंदर कुमार गोयल ने आज पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (पी.ए.यू.), लुधियाना में राज्य की पहली केंद्रीय धुरवी सिंचाई प्रणाली का उद्घाटन किया। यह उत्तरी भारत में आधुनिक, स्वचालित सिंचाई तकनीक की स्थापित की गई पहली परियोजना है।
इस अवसर पर पी.ए.यू. के वाइस चांसलर डॉ. सतबीर सिंह गोसल, डी.जी.एम. नाबार्ड अमित गर्ग तथा अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। प्रगतिशील किसान, वैज्ञानिक, फैकल्टी सदस्य तथा मृदा एवं जल संरक्षण, कृषि, बागवानी और अन्य संबद्ध विभागों के वरिष्ठ अधिकारी भी उद्घाटन समारोह में शामिल हुए।
इस मौके पर बोलते हुए कैबिनेट मंत्री बरिंदर कुमार गोयल ने वैज्ञानिकों, अधिकारियों और विद्यार्थियों से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (ए.आई.) के उभरते युग में नवाचार पर ध्यान केंद्रित करने और अत्याधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने की अपील की। उन्होंने पंजाब में भूजल की नाजुक स्थिति को उजागर करते हुए जल संरक्षण के लिए आधुनिक सिंचाई तरीकों को बढ़ावा देने की तत्काल आवश्यकता पर जोर दिया।
बरिंदर गोयल ने पंजाब सरकार की भूजल संरक्षण के प्रति दृढ़ प्रतिबद्धता को दोहराते हुए कृषि में सतही जल के उपयोग को बढ़ाने के लिए किए गए महत्वपूर्ण प्रयासों की सराहना की। उन्होंने पंजाब में उन्नत केंद्रीय धुरवी सिंचाई प्रणाली की शुरुआत के लिए मृदा एवं जल संरक्षण विभाग की प्रशंसा की तथा पी.ए.यू. में इस अग्रणी प्रदर्शन परियोजना को वित्तीय सहायता देने के लिए नाबार्ड का धन्यवाद किया।
तकनीक का वर्णन करते हुए मंत्री ने कहा कि केंद्रीय धुरी सिंचाई प्रणाली एक बार में पूर्णतः स्वचालित सिंचाई समाधान प्रदान करती है, जो विशेष रूप से श्रमिकों की कमी से जूझ रहे पंजाब के खेतों के लिए लाभदायक है। इस प्रणाली को किसी भी प्रकार के मानवीय हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं होती और 3 एकड़ के खेत के लिए सटीक सिंचाई केवल आवश्यक डेटा दर्ज करके प्राप्त की जा सकती है, जिससे पूरा कार्य एक ही चक्र में पूरा हो जाता है।
उन्होंने पंजाब के कृषि और ग्रामीण बुनियादी ढांचे के क्षेत्रों में नाबार्ड द्वारा लागू की जा रही विभिन्न योजनाओं और कार्यक्रमों पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने इस प्रकार की नवाचारी और मार्गदर्शक पहलों के लिए पूर्ण समर्थन देने का आश्वासन दिया, साथ ही चल रहे और आगामी परियोजनाओं के लिए निरंतर सहयोग का भी भरोसा दिलाया।
पी.ए.यू. में स्थापित विश्वस्तरीय सिंचाई सुविधा की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि यह किसानों के लिए सटीक और स्वचालित सिंचाई का एक उत्कृष्ट प्रदर्शन मॉडल सिद्ध होगा।
मुख्य मिट्टी संरक्षण अधिकारी महिंदर सिंह सैनी ने नाबार्ड समर्थित परियोजना के तकनीकी विवरण प्रस्तुत किए। उन्होंने बताया कि उल्टा स्प्रिंकलर सिस्टम 60 मीटर लंबे आर्म पर लगाए गए हैं, जो एक केंद्रीय धुरी बिंदु के चारों ओर घूमते हैं और बिना किसी मानवीय श्रम के 3 एकड़ के गोलाकार क्षेत्र की सिंचाई करते हैं। उन्होंने आगे कहा कि यह प्रणाली जल उपयोग दक्षता में उल्लेखनीय सुधार लाती है, फसल उत्पादन बढ़ाती है और पूरे राज्य में आधुनिक सिंचाई पद्धतियों के लिए एक आदर्श मॉडल के रूप में कार्य करेगी।
पंजाब में पहली केंद्रीय धुरवी सिंचाई प्रणाली का लुधियाना में उद्घाटन 